Saturday, May 25, 2024
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बदलाव 

खुद सुधरे तो दुनिया सुधरे, विचारों के खेल में

खुद जागे, दुनिया को जगाये, सत्कर्मो के मेल में -१

 

बुरी बात पर करे शिकायत, दे हिदायत दुनिया

सुधरने कितने मौके, देती है, ये दुनिया -२

 

ना बदले रंग तो सही, ढंग तो बदली जाती है

ढंग बदले देख लेना, जिंदगी बदल जाती है -३

 

दुनिया अपनी रिश्तेदार है, रिश्तेदार न कभी बदले

आज और कल भी जाना, सही तरीका कभी न बदले -४

 

खुद के बदलने से ये सारी, दुनिया तशविर बदले

खुद के बदलने से ही भाई, अपनी तक़दीर बदले -५

भावार्थ

1-शुरुवात तो खुद से करनी होती है, चाहे वह खुद का विश्लेषण हो या फिर खुद का विचार हो. दुनियां को देखकर उसके हिसाब से जीना नहीं है जों सही है उसके हिसाब से जीना है. खुद अगर सुधार कर लिए तो दुनिया को सुधारने की जरुरत नहीं होगी, हमें देखकर दुनिया ढलेगी ही. सत्कर्म का मेल अगर अच्छा हो गया तो जीवन सुगम हो जाएगा.

2-दुनियां डांटती है, फटकारती है, कमियां भी निकालती है. दुनिया हमें सुधरने के कितने मौके देती है. मौकों का फायदा उठाकर हमें सुधरना ही चाहिएं.

3-रंग बदलने की जरुरत तो है नहीं सिर्फ ढंग बदल जाएँ तो भी बहुत है. ढंग बदलने से जिंदगी बदल ही जाती है इसीलिए जिंदगी के बदलने के लिए ढंग बदलना जरुरी है. जिंदगी में २ रास्ते होते है उसमे चुनाव हम कौनसा करते इसपर हमारा व्यक्तित्व बनता है.

4-दुनिया अपनी रिश्तेदार है, उसके साथ तो जीना ही है पर जीवन में सही तरीका कभी न बदले. सही तरीका रहेगा तो जीवन में तनाव नहीं आएगा और काम भी हो जाएगा.

5-दुनिया कभी नहीं बदलेगी खुद को बदलना होगा. हम खुद को बदलेंगे तो दुनिया बदलेगी नहीं तो दुनिया भी जगह पर ही थम जायेगी. अपनी तक़दीर खुद के बदलने से बदलती है.

      वेचानसिंह सुलिया(जीवनदर्शन समूह)

 

Wechansing Suliya
Wechansing Suliyahttps://jiwandarshan.com
I am Professor of HR and OB. I am Author, Poet and Singer. I organize workshop on personality development and entrepreneurial development for General public and in education institutions.
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