Saturday, May 25, 2024
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मै अहम् हूँ

शरीर के साथ, जिव धीरे धीरे आगे बढ़ा।

ग्यान की बाते लेकर, इन्सान जीवन चढ़ा।

जिंदगी में जों भी, सिर्फ मैंने ही किया है।

सुख भी मेरा, दुःख मेरा, और कुछ न पाया है। -१ मै अहम् हूँ

 

अच्छी दुनिया, बुरी दुनिया सब मैंने बनाई है।

मै एक तत्व हूँ जिव का,दुनिया मेरी सजाई है।

मै जों भी कहूँ , वह सब तो मेरा है।

मैंने कभी नहीं सोचा, मेरा सिमित डेरा है। -२ मै अहम् हूँ, मै ही भरम हूँ 

 

मुझे जों गलत लगता है, वह गलत है।

मुझे जों सही लगता है वह सही है।

मैंने अपनी मान्यता को, सदा पनाह देता हूँ।

मैंने अपने उसुलों को, सिर्सफ जगह देता हूँ। -३ मै अहम् हूँ, मै ही वहम हूँ 

 

दुनिया में कुछ भी चले, मै तो मेरा जानता हूँ।

सच क्या है, ये सिर्फ मै ही तो जानता हूँ।

मैंने अब तक, जों भी किया, वह सब सच है।

जों समझा है, जो माना है, वह सब सच है। -४ मै अहम् हूँ, मै ही शरम हूँ 

 

 

शरीर का अस्तित्व जैसा ख़त्म हुआ,

मै कहीं का का बचा ही नहीं।

मै -मै करने वाला मै अब,

मै मै करता रहा नहीं । -५ मै अहम् हूँ, मै मिटनेवाली रेखा हूँ, मै क्षणिक हूँ।

भावार्थ

१-अहम् एक भ्रम है जों जन्म के बाद धीरे धीरे पड़ा होता है और शरीर के कर्म को अहम् अपना मान बैठा।

२-दुनिया मैंने बनाई है, दुनिया अच्छी होती है और बुरी भी होती है, मै अपने हिसाब से दुनिया को अच्छी बुरी कहता रहता हूँ। मेरे मेरे स्वार्थ के लिए दुनिया की तारीफ़ भी करता हूँ और मेरे स्वार्थ के लिए ही दुनिया की बुराई भी करता हूँ।

३-मै जों कहता हूँ वह सही और मै जों कहता हूँ वह गलत है, मै अपने हिसाब से दुनिया को तोल सकता हूँ क्यों की मुझे पता है की दुनिया कैसी है और मै किसी का सुनूंगा नहीं क्योंकी मै ग्यानी हूँ और सब जानता हूँ।

४-जों मै कर रहा हूँ वह भी सही है और जों मै जानता हूँ वह भी सही है। मै किसी की सुनूंगा ही नहीं क्योंकी मै जों मानता हूँ वही सही है।

५-शरीर नाम का अस्तिव ख़त्म हुवा और अहम् बचा नहीं, वह कहीं नजर भी नहीं आता और कुछ बोलता भी नहीं है। अहम् एक भ्रम है जों था और अब ख़तम हो गया। अहम् जिंदगी जीते जी ख़त्म हो जाएँ तो इन्सान एकदम निर्मल और सिधा बन जाता है। अहम् अगर जिंदगी में ख़त्म हो जाए तो इन्सान के छह शत्रु काम, क्रोध, मद, मोह, मत्सर और लोभ ख़त्म हो जायेंगे।

Wechansing Suliya
Wechansing Suliyahttps://jiwandarshan.com
I am Professor of HR and OB. I am Author, Poet and Singer. I organize workshop on personality development and entrepreneurial development for General public and in education institutions.
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