Saturday, May 25, 2024
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कहानियों की दुनिया

अब तो निकले बचकानी से, कहनियों की वह थी दुनिया

कहानिया समझ के लिए होती, अपनी अलग है दुनिया-१

 

कोई उड़ता, गायब होता, कोई उगलता आग है

सब जों भी चमत्कार हुए, कहानियों के ही भाग है-२

 

बच्चा बच्चा होता है भाई, छोड़े अब बचकाना

कल्पना की दुनिया से परे, अपना जीवन जीना -३

 

भगवान को पूजते पूजते, भगवान कभी मिला नहीं

सही समझ ही भगवान है, पर  जीवन खिला नहीं-४

 

सही समझ अभी रखनी होगी, मुक्ति का द्वार देखे

ठण्ड अब जहाँ भी लगे, उन अंगों को सेकें-५

 

कल्पना की आड़ लेकर सब चरित्र भी रच डाले

अंधविश्वास मन में रखकर फिर सच कोण पाले -६

 

भरम को और आगे बढाने, रची कहानियों की दुनिया

कहानियों को सच मानती, यैसी है यह दुनिया-७

                                               –  वेचानसिंग जामसिंग सुलिया

भावार्थ: आओ अब कहानियों की दुनिया से बाहर निकले

१-कहानियां बच्चों के लिए होती है, कहानियां बच्चो को समझाने के लिए होती है, जानकार इन्सान को बच्चों की कहानियों से बाहर निकलकर वास्तविकता में आना चाहिए.

२-प्राकृतिक बात तो प्राकृतिक ही रहती है पर कहानियों में कुछ बातों को अप्राकृतिक बताने की कोशिश की है और यहाँ से शुरू होता है भय और भ्रम का राज. आग उगलने वाले राक्षस और पानी उगलने वाले राक्षस होते है, ये कहनियों का अंश धीरे धीरे सच मानने लगे.

३-बचकाना छोड़कर अभी कल्पना की दुनिया में बाहर निकलना है. कल्पना की दुनियां से बाहर निकलकर बचकाना छोड़ देना है.

४-इन्सान भगवान को पूजते रह गया पर अच्छे विचार और सदविचार को छोड़कर और कोई भगवान कैसे हो सकता है ? भगवान का अस्तित्व भलाई में है, इसलिए भलाई करना ही पूजन के बराबर है.

५-सही समझ देखकर आगे मुक्ति का द्वार देखना होगा. जहाँ जहाँ समस्या है उन समस्याओं को सुलझाना जरुरी है.

६-चरित्र रच भी दिए तो उसमे जों भी अप्राकृतिक बात है वह सत्य हो ही नहीं सकता. प्रकृति में अप्राकृतिक बात कहाँ से आएगी? अद्भुत ऐसा कुछ होता नहीं है, यह लोगों का भरम है. चरित्र रचनेवाले भी ऐसे ही और पढ़ने वाले उससे भी पार है.

७-यहाँ पर भरम और डर बहुत बिकता है. भरम और डर को आगे बढ़ाने के लिए कहानियां रची गई और दुनिया ने बहुत सारी बातों को सच मान लिया.

 

Wechansing Suliya
Wechansing Suliyahttps://jiwandarshan.com
I am Professor of HR and OB. I am Author, Poet and Singer. I organize workshop on personality development and entrepreneurial development for General public and in education institutions.
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