Saturday, May 25, 2024
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Homeजीवन मंत्रगुरु और सलाहक़र, जिंदगी सुखी संसार ।

गुरु और सलाहक़र, जिंदगी सुखी संसार ।

जीवन के क्षण आते-जाते है। कभी गहरे संकट भी आते है तो कभी सुख भी। जहाँ तक सुख की बात है, हम उपभोग लेते है पर दुःख और संकट में  गुरु और सलाहाकार की जरुरत होती है। गुरु और सलाहाकार में कुछ मुख्य फर्क होता है, आज हम इस लेख के माध्यम से समझने की कोशिश करते है।

           गुरु का नाम लेते ही एक अलग भावना और सकारात्मक भावना मन में जग जाती है। गुरु के पास एक दूरदृष्टी होती है, गुरु सोचते और समझते समय भविष्य के बारे में सोचता है। अतीत के बारे में गहन अध्ययन करता है। गुरु एक ऐसा सक्श होता है, ज्यो सिस्यों का बुरा नहीं सोचता। उसके मन में प्रेम होता है। आगे बढ़ने के लिए कभी-कभी वह गुस्सा भी प्रकट करता है पर मुख्य वजह तो प्रेम ही होता है। गुरु अपने आदर्श, अपने संस्कार को लेकर चलता है और उसी के आधार पर शिष्यों को भी आगे बढ़ाने की मन में ठान ही लेता है। गुरु विचारों और कृतियों में अच्छाई की प्रतिक होता है। वह गहन भविष्य को देखते हुए आगे बढ़ता है और मार्गदर्शन भी करता है।

           सलाहकार का नाम लेते ही मध्यम भावना मन में जागती है। सलाहकार भी जिंदगी में अहम् है। वह हमारी जरूरतों को पूरा कर तो सकता है पर पुर्णतः वह हमारे विषय में प्रेममय रहेगा, कहा नहीं जा सकता। वह ज्यादा सफ़लता की ओर देखता है, सफ़लता उसका पहला लक्ष्य भी होता है और राह भी। सलाहकार सफलता पाने के लिए एक कूटनीति रच सकता है पर वह सही या कभी-कभी दूसरों का नुकसान भी करा सकती है। वह कभी-कभी तो सिर्फ काम निकाल देता और निकाल भी लेता है।

           जिंदगी में गुरु और सलाहकार का अपना-अपना स्थान होता है, कभी गुरु की भी जरुरत आ जाती तब गुरु काम में आता है तो कभी सलाहकार भी जिंदगी का मुख्य हिस्सा बन जाता है।

वेचानसिंग जामसिंग सुलिया (प्रमुख मार्गदर्शकजीवनदर्शन)

Wechansing Suliya
Wechansing Suliyahttps://jiwandarshan.com
I am Professor of HR and OB. I am Author, Poet and Singer. I organize workshop on personality development and entrepreneurial development for General public and in education institutions.
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