Saturday, May 25, 2024
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Homeकविताएँ'अंतिम लक्ष्य'-मन की शान्ति

‘अंतिम लक्ष्य’-मन की शान्ति

जों जों कल हो गया, आज का है दिन नया।

सिख हो तो याद करे, नहीं तो वह बीत गया। -१

अपनी बुद्धि जों कहे, वह तो सत्य  ही कहे।

अपने अहम् में खोकर, इन्सान भरम में रहे। -२

दाता जों भी है अपना, न भुलें अपना धरम।

काम ही तो करना है, क्यों करे फिर ओर करम। – ३

सत्य एक सामने, सबुत भी उसके सामने।

इन्सान जों बढ़ा बने, बनाया उसके काम ने। -४

मेरे पास कुछ नहीं, दो है हाथ और दिमाख।

दुनिया में है भला, इससे बढ़ी न कोई साख। -५

मै चलू छाया चले, सत्य यैसा ही चले।

सत्य और कर्म में, मानव मन  यूँ पले। – ६

चारों ओर जों घुमे, राहे तो अनेक है।

एक राह, एक बात, लक्ष्य तो, बस एक है। -७

भावार्थ

१-कल तो बीत गया है, बीतें हुए कल को क्या याद करे ? कल से कुछ सिख मिलती हो तो उसे याद करे वरना कल को याद करके लक्ष्य धुमिल नहीं होना चाहिए।

२-अपनी सद्बुद्धि जों भी कहती है, एकदम सही कहती है पर अहंकार के चपेट में आकर इन्सान भरम में रहता है।

३-प्रकृति कभी अपने धरम को भूलती नहीं है, फिर लक्ष्य को भटककर जादा का काम भला हम क्यों करे ? एक लक्ष्य के पीछे चलना चाहिए और एक ही लक्ष्य रखना चाहिए।

४-इन्सान जितना बढ़ा बनता है खुद के काम के वजह से बनता है, सत्य जों भी है वह साफ़-साफ़ सबुत के साथ सबके सामने दिखता है।

५-मेरे पास मेरे दो हाथ है और दिमाख है, बाकी कुछ भी नहीं है पर हाथ और दिमाख के साख के बल पर मै मेरी दुनिया बना दूंगा।

६-कर्म की छाया बनकर सत्य चलता है, सत्य चलता है सच्चाई का साथ देनेवाला। कर्म के पीछे इन्सान को चलना ही होता है।

७-लक्ष्य तो बस एक होना चाहिए जिसे पाने के बाद किसी लक्ष्य की चाह ही ना बचे लक्ष्य जों एक है वह है मुक्ति का लक्ष्य। अनमोल लक्ष्य की प्राप्ति के बाद कोई भी इच्छा शेष नहीं रहती।

 

Wechansing Suliya
Wechansing Suliyahttps://jiwandarshan.com
I am Professor of HR and OB. I am Author, Poet and Singer. I organize workshop on personality development and entrepreneurial development for General public and in education institutions.
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