Saturday, May 25, 2024
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Homeजीवन मंत्रमन के हारे, हार है; मन के जीते, जीत.

मन के हारे, हार है; मन के जीते, जीत.

मन एक ऐसी जगह है ज्यो शक्ति का स्थान माना जाता है. मन एक उर्जा का स्त्रोत है ज्यो इन्सान को कुछ में काम करवा सकता है. मन में अगर जीत है तो जीत ही होती है, मन में अगर हार ही है तो कोई भगवान् उसे जीता नहीं सकता. मन एक ऐसा साथी है ज्यो बहुत अच्छा या बुरा साथ दे सकता है. कहते तो है ‘मन के हारे हार है, मन के जीते जीत’ एकदम सही बात है. मन में शंका बहुत ही कड़वी बात होती है, मन की शंका और मन की बीमारी एक ही होती है. हमारा मन तो कुछ भी कर सकता है पर उसके साथ संस्कार का लगाम बहुत जरुरी होता है.

मन में हलचल कुछ भी हो, वह फिर जगत में आगे निकल कर आ जाती है. मन एक ऐसी वस्तु है ज्यो दिखती तो नहीं पर दुनिया बना देती है. दुनिया वह फिर छोटे बच्चे की हो या बढों की, मन ही बनाता है. कोई भी कल्पना, कोई भी संकल्पना, मन ही तो बुनता है. मन एक ऐसी चाबी है ज्यो दोनों तरफ घुमाई जा सकती है, एक तरफ वह अच्छे कर्म करवाती है तो दूसरी और बुरे कर्म करवा लेती है. इसीलिए मन को संभालना, मन को सही दिशा में रखना, बहुत जरुरी है.

  • वेचानसिंग जामसिंग सुलिया (जीवनदर्शन के मुख्य मार्गदर्शक)
Wechansing Suliya
Wechansing Suliyahttps://jiwandarshan.com
I am Professor of HR and OB. I am Author, Poet and Singer. I organize workshop on personality development and entrepreneurial development for General public and in education institutions.
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